फ़ाउंडेशन का परिचय
जो प्राचीन है उसकी रक्षा, जो वर्तमान है उसकी सेवा
आचार्य शांति सागर फाउंडेशन 2019 में स्थापित एक गैर-लाभकारी न्यास है, जो पांडुलिपि संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना और सामुदायिक सेवाओं में कार्य करता है — विरासत और मानवता को एक ही प्रतिबद्धता मानकर।

चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज
1872 – 1955
फ़ाउंडेशन आचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज का नाम धारण करता है और उनकी परंपरा को आगे बढ़ाता है — बीसवीं शताब्दी के दिगंबर पुनर्जागरण के प्रथम आचार्य, जिनकी शिक्षाओं ने ASSF के मूल दर्शन को आकार दिया।
भारतीय डाक ने उनके सम्मान में ₹5 का स्मारक डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण जारी किया। उनकी मुनि दीक्षा और आचार्य पद प्रतिष्ठापना की शताब्दियाँ वर्तमान संरक्षण कार्यक्रम का अवसर हैं।



क्रिया करनी चाहिए तब अपना कार्य सिद्ध होता है।
परस्परोपग्रहो जीवानाम्
Parasparopagraho Jivanamसभी जीव परस्पर सहयोग से बँधे हैं।
विरासत और मानवता, परस्पर बँधी
प्राचीन पांडुलिपि का संरक्षण पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान की रक्षा करता है। ग्रामीण समुदाय को सशक्त करना ऐसी परिस्थितियाँ बनाता है जिनमें लोग गरिमा के साथ जी सकें, सीख सकें और बढ़ सकें। फ़ाउंडेशन के लिए ये दो मिशन नहीं — एक ही हैं।
मिशन, दृष्टि और मूल्य
जो प्राचीन है उसकी रक्षा,पांडुलिपि संरक्षणजो वर्तमान है उसकी सेवा,सामुदायिक सेवाएँऔर जो आवश्यक है उसका निर्माण।ग्रामीण अवसंरचना
सजग, करुणामय और अहिंसक मूल्यों से गढ़ी जीवन-पद्धति को आगे ले जाना — उन मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाले ज्ञान का संरक्षण करते हुए और सेवा के माध्यम से उन्हें व्यवहार में उतारते हुए।
मूल्य — पाँच सिद्धांत, एक जीवन-पद्धति
- अहिंसा
- हर निर्णय, हर कार्यक्रम, हर संबंध एक ही प्रश्न से आरंभ होता है: क्या इससे किसी को हानि होती है?
- सत्य
- प्राचीन ज्ञान का बिना विकृति के संरक्षण, बिना दिखावे के समुदायों की सेवा, और फ़ाउंडेशन के कार्य में पूर्ण पारदर्शिता।
- अपरिग्रह
- पर्याप्त होना भी एक दर्शन है। फ़ाउंडेशन को सौंपे गए संसाधन सीधे शिक्षा, विरासत और सामुदायिक उत्थान में लगते हैं।
- अनेकान्तवाद
- अभिरक्षकों, समुदायों और संस्थाओं से विनम्रता और खुलेपन के साथ जुड़ाव — संप्रदायों, क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के पार।
- करुणा · सेवा
- संसार से विरक्ति नहीं, उसकी सेवा: कक्षाओं, समुदायों और जो खोना नहीं चाहिए उसे सहेजने के शांत कार्य में दर्शन को व्यवहार में उतारना।
मिशन कैसे आकार लेता है
पांडुलिपि संरक्षण
हाथ से लिखे ज्ञान का संरक्षण
नाज़ुक ताड़पत्र और हस्तलिखित कागज़ी पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण — आकलन, उपचार, प्रलेखन, अभिलेखीय आवास और डिजिटलीकरण।
पांडुलिपि संरक्षण देखेंग्रामीण अवसंरचना
समुदायों की सेवा करने वाले स्थान
सामुदायिक भवन, कर्मचारी आवास और सार्वजनिक स्वच्छता — वहाँ, जहाँ किसी सुविधा का अभाव गाँव की संभावनाएँ सीमित करता है।
ग्रामीण अवसंरचना देखेंसामुदायिक सेवाएँ
जहाँ आवश्यकता तत्काल है, वहाँ उत्तर
निःशुल्क चिकित्सा शिविर, शिक्षा सहायता और आपदा राहत — हर समुदाय की वास्तविक परिस्थिति के अनुसार।
सामुदायिक सेवाएँ देखेंकार्य, जैसा वह दिखता है





ताड़पत्रों का पुनरुद्धार
कुंभोज बाहुबली कार्यक्रम पर फ़ाउंडेशन की अपनी लघु फ़िल्म — प्रलेखन, उपचार और डिजिटलीकरण, संरक्षण कार्य के दौरान ही फ़िल्माए गए। हिन्दी में।
जिसकी रक्षा शेष है, वह संरक्षित से कहीं अधिक है
आवश्यकता का विस्तार समझने के लिए फ़ाउंडेशन ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के ग्रंथ-भंडारों का सर्वेक्षण किया — संग्रहों को स्वयं जाकर देखा, प्रतिनिधि सामग्री के चित्र लिए, और अभिरक्षकों के साथ भंडारण की स्थितियाँ दर्ज कीं।
| माप | कर्नाटक | महाराष्ट्र | तमिलनाडु | सभी राज्य |
|---|---|---|---|---|
| सर्वेक्षित ग्रंथ-भंडार | 3 | 6 | 9 | 18 |
| दर्ज पांडुलिपियाँ | 7,118 | 4,591 | 972 | 12,681 |
| दर्ज पत्र | 10,75,520 | 4,59,708 | 1,79,700 | 17,14,928 |
- 10,75,520
कर्नाटक
सर्वेक्षण में दर्ज पत्र
- 4,59,708
महाराष्ट्र
सर्वेक्षण में दर्ज पत्र
- 1,79,700
तमिलनाडु
सर्वेक्षण में दर्ज पत्र
हर रेखा एक ही पैमाने पर खींची गई है।
विरासत और मानवता की सेवा में
