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हिन्दी संस्करण — यह अनुवाद फ़ाउंडेशन की समीक्षा की प्रतीक्षा में है।मूल अंग्रेज़ी पाठ पढ़ें

आचार्य शांति सागर फाउंडेशन

ज्ञान का संरक्षण। जन की सेवा। भविष्य का निर्माण।

पांडुलिपि संरक्षण: इन पन्नों ने सदियाँ पार की हैं।

पांडुलिपि संरक्षण

इन पन्नों ने सदियाँ पार की हैं।

क्या ये अगली सदी भी पार करेंगे? हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि उत्तर ‘हाँ’ हो।

कुंभोज और कारंजा लाड में 1,34,545 पत्रों का संरक्षण

पांडुलिपि का संरक्षण कैसे होता है →
श्रवणबेलगोला में लाल वस्त्र पर रखी ताड़पत्र और कागज़ी पांडुलिपियाँ; पास खड़े मुनि और फ़ाउंडेशन के सदस्य।
ब्लॉटिंग कागज़ पर देवनागरी में हस्तलिखित एक पत्र, पास में चिमटी से पकड़ी pH सूचक पट्टी।
नारंगी चित्रित पत्र जिसमें हाथी, सफ़ेद बैल, सिंह, अर्धचंद्र, मछली और कलश हैं।

आचार्य शांति सागर फाउंडेशन 2019 में स्थापित एक धर्मार्थ संस्था है, जो भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, ग्रामीण समुदायों को सशक्त करने और व्यावहारिक मानवीय आवश्यकताओं के प्रति उत्तर देने के लिए कार्य करती है।

पंजीकृत न्यास, बेंगलुरु — GAN-4-00431-2018-19

तीन स्तंभ, एक उद्देश्य

विरासत और मानवता परस्पर बँधी हैं: पांडुलिपि का संरक्षण पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान की रक्षा करता है; गाँव को सशक्त करना लोगों को गरिमा के साथ जीने, सीखने और बढ़ने में सहायता करता है।

अब तक का हमारा कार्य

संरक्षित पांडुलिपियाँ
1,620+
कुंभोज 1,399 · कारंजा लाड 221 — दो पूर्ण परियोजनाएँ।
संरक्षित पत्र
1,34,545+
कुंभोज 1,06,277 · कारंजा लाड 28,268 — पत्र-दर-पत्र आकलन, उपचार और पुनः संग्रहण।
सर्वेक्षित ग्रंथ-भंडार
18
कर्नाटक 3 · महाराष्ट्र 6 · तमिलनाडु 9।
सर्वेक्षण में दर्ज पत्र
17,14,928
12,681 पांडुलिपियों में — जिनकी रक्षा अभी शेष है, उसका माप।
पूरा प्रभाव देखें →

कार्य, निकट से

संरक्षण अभिरक्षक के पास होता है — आगंतुकों, मुनियों और संरक्षकों से भरे कक्षों में। ये श्रवणबेलगोला, कारंजा लाड और कुंभोज से फ़ाउंडेशन के अपने चित्र हैं।

  • लाल वस्त्र पर पंक्तियों में रखे ताड़पत्र के गट्ठर और वस्त्र में लिपटी पांडुलिपियाँ।
    श्रवणबेलगोला कार्यक्रम के आरंभ में सजाए गए ताड़पत्र के गट्ठर और लिपटी पांडुलिपियाँ, जुलाई 2025।
  • सफ़ेद कमीज़ में एक व्यक्ति, गद्देदार पटरे पर रखे ताड़पत्र पर काम करते हुए।
    ताड़पत्र पर कार्य, श्रवणबेलगोला कार्यशाला।
  • ट्रे में खुली कागज़ी पांडुलिपि पर झुके तीन मुनि।
    श्रवणबेलगोला उद्घाटन पर कागज़ी पांडुलिपि पढ़ते मुनि।
  • मैरून बैनर के नीचे एक भवन का प्रवेश द्वार, जिस पर ताड़पत्र और कागज़ी जिनवाणी की प्रदर्शनी की घोषणा है।
    ताड़पत्र और कागज़ी जिनवाणी की फ़ाउंडेशन की प्रदर्शनी, कारंजा लाड।
  • ताड़पत्रों से भरी मेज़ के चारों ओर सफ़ेद कोट में संरक्षक और आगंतुक।
    ताड़पत्र की मेज़ पर संरक्षक और आगंतुक, श्रवणबेलगोला कार्यशाला।
  • कैमरे के पास मेज़ पर फैले हस्तलिखित पत्रों को देखते तीन व्यक्ति।
    कारंजा लाड में पत्रों का अवलोकन करते आगंतुक।
  • संरक्षण की मेज़ के पास एकत्र मुनियों का बड़ा समूह।
    कुंभोज में संरक्षण कार्य देखने आए मुनि।
  • उजले संरक्षण कक्ष में नीले वस्त्र पर रखे कागज़ के रोल।
    कारंजा लाड प्रदर्शनी का संरक्षण कक्ष।

जैन ताड़पत्र संरक्षण मिशन

एक जीवन, एक पत्र

एक पत्र के संरक्षण में ₹414 लगते हैं; हर दाता को दान की रसीद और आभार-पत्र मिलता है। पूरे ग्रंथ — लगभग 100 पत्र, ₹41,400 — का व्यय वहन करें, तो उसे लपेटने वाले वस्त्र पर आपका नाम लिखा जाता है।

कार्य से उठे स्वर

इस कार्य का प्रभाव उन्हीं लोगों और संस्थाओं के माध्यम से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है, जो इसे प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।

श्रुतजो सुना गया— कारंजा लाड में रिकॉर्ड किया गया, जहाँ फ़ाउंडेशन का संरक्षण कार्य चल रहा है।

आशीर्वचन, कारंजा में

आप भी इस तरह के जीर्णोद्धार को कराएँ, जिससे ग्रंथ सैकड़ों साल के लिए पुनर्जीवित हो जाएँ।

अनुवाद

Have this kind of restoration done too, so that the granthas come back to life for hundreds of years.

— मुनि श्री १०८ सुब्रत सागरजी महाराजश्री महावीर ब्रह्मचर्याश्रम गुरुकुल आश्रम, कारंजा लाड में
पूरी रिकॉर्डिंग पढ़ें

जैन समाज की काशी — महाराष्ट्र का कारंजा नगर। समन्तभद्राचार्य द्वारा स्थापित महावीर दिगंबर जैन गुरुकुल। इसमें प्राचीन जैन साहित्य का जीर्णोद्धार, पुनर्लेखन, आलेखन, व्यवस्था करने का कार्य श्री शान्तिसागर फ़ाउंडेशन, बैंगलोर के द्वारा हो रहा है, जिसे हमारे मंत्रीवर […] जी, जो धन्यकुमार जी के सुपुत्र हैं, उन्होंने समग्र जीर्णोद्धार के कार्यों को दिखाया। देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई। और मैं समग्र भारतवासी जैन समाज से एवं प्राचीन ग्रंथवानों से भाव रखता हूँ कि आप भी इस तरह के जीर्णोद्धार को कराएँ, जिससे ग्रंथ सैकड़ों साल के लिए पुनर्जीवित हो जाएँ और धर्म एवं संस्कृति का संरक्षण हो। इस हेतु सकल समाज एवं फ़ाउंडेशन के लिए मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद, आशीर्वाद।

Karanja, in Maharashtra — the Kashi of the Jain community. The Mahavir Digambar Jain Gurukul, founded by Acharya Samantabhadra. Here, the restoration of ancient Jain literature — its recopying, recording and ordering — is being done by the Shri Shanti Sagar Foundation, Bangalore. Our secretary, […] ji, son of Dhanyakumar ji, showed us all of the restoration work. Seeing it brought great joy. And to the Jain community across India, and to all who keep ancient granthas, I say: have this kind of restoration done too, so that the granthas come back to life for hundreds of years and our dharma and culture are preserved. For this, my many, many blessings to the whole community and to the Foundation.

रिकॉर्डिंग से लिप्यंतरित। […] उस शब्द के स्थान पर है जो स्पष्ट नहीं सुना जा सका।

आगंतुकों के एक दल से, कारंजा में

एक-एक प्रोसेस इतना नियंत्रित तरीके से होता है… अब मैं जितना बोलूँ, उतना कम है।

अनुवाद

Every single process is done in such a controlled way… however much I say, it falls short.

— नाम फ़ाउंडेशन से प्रतीक्षित
पूरी रिकॉर्डिंग पढ़ें

तो कारंजा का कितना बड़ा महत्व है। और ये धरोहर — पाँच सौ, साढ़े पाँच सौ साल पुरानी धरोहर — आज जिस प्रकार सँभाल के रखना… और समय के साथ वो खंडित तो होती है। तो फिर उसको और आगे ले जाने के लिए ये टीम जूझ रही है, लगातार। ये जो अभी इस तरह से आप देख रहे हैं न, यह ऐसा नहीं होता है। आप यहाँ जब वो काम सारा चलता है, तब वो देखने जैसा है कि किस प्रकार वो एक-एक पत्र को […] सँभालते हैं, उसका कार्य करते हैं। […] इंक डाइल्यूट हो जाती है, तो उसके लिए प्रॉपर सॉल्यूशन बना के… एक-एक प्रोसेस इतना नियंत्रित तरीके से होता है, कि अगर ऐसे ही किया जाए, तो ये और छिन्न-भिन्न होके ख़राब हो जाएगा। और ये एक बार यहाँ से जो ग्रंथ पास होके जाता है, उसकी लाइफ़ और 100–150 साल बढ़ जाती है, क्योंकि उसके ऊपर लेमिनेशन होता है — आपको दिखेगा भी नहीं कि ये लेमिनेशन किया गया है। और सबसे बड़ी बात कि यह सारा प्रोसेस रिवर्सिबल है। कहीं भी कोई ऐसे केमिकल का यूज़ नहीं हुआ है कि वो उसको डैमेज करे, और […] ख़राब करे। कि आप उसको ओरिजिनल में ले जाना चाहते हो, तो आप उसको पूरा रिवर्सिबल कर सकते हो। इस प्रकार का सारा कार्य होता है। मतलब, अब मैं जितना बोलूँ, उतना कम है। आप एक-एक चीज़ में कितना समय देते हो, वही चीज़ बताती है — इसमें गर्व है, इन्वॉल्वमेंट है।

So — how great Karanja's importance is. And this heritage — five hundred, five hundred and fifty years old — keeping it safe the way it is today… and with time, it does break apart. So, to carry it further forward, this team is at it, without a break. What you're seeing now, like this — it isn't like this. When the work is going on here, that is worth seeing — how they handle each single leaf […], how they work on it. […] the ink has thinned, so they make up a proper solution for it… every single process is done in such a controlled way, because done any other way, it would come apart and be ruined. And once a grantha has passed through here, its life grows by another 100–150 years, because it is laminated — and you won't even see that it has been laminated. And the biggest thing: this whole process is reversible. Nowhere is any chemical used that would damage it, or […] ruin it. If you want to take it back to the original, you can reverse it completely. That is the kind of work done here. Honestly — however much I say, it falls short. How much time you give to every single thing says it all — there is pride in it, and involvement.

रिकॉर्डिंग से लिप्यंतरित। […] उस शब्द के स्थान पर है जो स्पष्ट नहीं सुना जा सका।

लिखितजो लिखा गया— फ़ाउंडेशन की आगंतुक पुस्तिका से, जैसा लिखा गया वैसा ही उद्धृत।

आगंतुक पुस्तिका से — महाराष्ट्र शासन

The work of conservation and preservation of “Jinvani” is an excellent and priceless work. This work will definitely increase the life span of all texts which are rarely available. All the best for noble work.

अनुवाद

‘जिनवाणी’ के संरक्षण और परिरक्षण का कार्य उत्कृष्ट और अमूल्य है। यह कार्य उन सभी दुर्लभ ग्रंथों की आयु निश्चित रूप से बढ़ाएगा। इस पुण्य कार्य के लिए शुभकामनाएँ।

— Dr. Jyotsna Padiyar, IASआयुक्त, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी, नियोजन विभाग, महाराष्ट्र शासनश्री कृष्ण फिरके, विशेष आयुक्त, और अमोल खंडारे, अपर आयुक्त के साथ हस्ताक्षरित।

आगंतुक पुस्तिका से — वाशिम के एक आगंतुक

Seeing the restoration work of more than 1000 granths of our Jainism, filled me with immense pride and happiness. It made me realize the greatness of our saints who worked hard for the betterment of society and spiritual upliftment. I am deeply grateful for the restoration team, the trust and everyone involved for their initiative and extremely happy for all the work that has been done and is still going on. Thank you for reviving the gems of Jainism.

अनुवाद

हमारे जैन धर्म के 1000 से अधिक ग्रंथों के पुनरुद्धार का कार्य देखकर मुझे अपार गर्व और प्रसन्नता हुई। इससे मुझे हमारे उन संतों की महानता का बोध हुआ, जिन्होंने समाज की भलाई और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कठोर परिश्रम किया। मैं पुनरुद्धार दल, न्यास और इस पहल से जुड़े सभी लोगों का हृदय से आभारी हूँ, और अब तक हुए तथा अभी जारी सारे कार्य से अत्यंत प्रसन्न हूँ। जैन धर्म के रत्नों को पुनर्जीवित करने के लिए धन्यवाद।

— Rishabh Jitendra Chhabdaवाशिम, महाराष्ट्र

क्षेत्र से

  1. 11 जुलाई 2025 · श्रवणबेलगोला

    श्रवणबेलगोला में अति प्राचीन ताड़ पत्र व हस्त लिखित शास्त्रों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य प्रारंभ।

    बाहुबली प्राकृत भवन, श्रवणबेलगोला में संरक्षण आरंभ — 2,695 ग्रंथ और 3,65,520 पत्र, फ़ाउंडेशन के सबसे बड़े जारी कार्यक्रमों में से एक।

  2. 15 नवंबर 2024 · परसोला, राजस्थान

    अदृश्य भक्ति के दर्शन: शांति सागर महोत्सव का आलोक

    परसोला में महोत्सव की शोभायात्रा, 13 अक्टूबर 2024।

  3. 13 नवंबर 2024 · भारतीय डाक

    आचार्य श्री शांति सागर जी पर विशेष ₹5 डाक टिकट का शुभ विमोचन

    आचार्य श्री शांति सागर जी के ₹5 स्मारक डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण का विमोचन।

इस कार्य से जुड़ें

  • क्या आपके पास पांडुलिपियाँ हैं?

    अपने संग्रह के सर्वेक्षण के लिए कहें। लगभग 1,000 शास्त्रों के संग्रह के लिए संरक्षण प्रयोगशाला आपके अपने परिसर में स्थापित की जाती है।

    अपने संग्रह का सर्वेक्षण करवाएँ
  • हमारे साझेदार बनें

    संस्थागत सहभागिता — अभिरक्षक संस्थाओं, अस्पतालों, विद्यालयों, सामुदायिक संगठनों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के साथ।

    फ़ाउंडेशन को लिखें
  • हमारे साथ काम करें

    संरक्षण और फ़ाउंडेशन के सामुदायिक कार्य में व्यावसायिक विशेषज्ञता और भागीदारी।

    फ़ाउंडेशन को लिखें
  • कार्य में सहयोग करें

    किसी पत्र के संरक्षण का व्यय वहन करें, या फ़ाउंडेशन के कार्यक्रमों में सहयोग करें।

    एक पत्र का संरक्षण करें

क्या आपके पास ताड़पत्र या कागज़ी पांडुलिपियाँ हैं?

भंडारों, मंदिरों, मठों और परिवारों के पास ऐसे पत्र हैं जो इस समय नष्ट हो रहे हैं — कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के फ़ाउंडेशन के अपने सर्वेक्षण में इतना मिला, जितने का अभी तक उपचार नहीं हो पाया है। जहाँ संग्रह लगभग 1,000 शास्त्रों (70,000–1,00,000 पृष्ठ) का हो, वहाँ संरक्षण प्रयोगशाला अभिरक्षक के अपने स्थान पर स्थापित की जाती है, ताकि पांडुलिपियाँ वहाँ से कभी बाहर न जाएँ। फ़ोन से तस्वीरें भेजें, या फ़ोन करें।

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+91 8095588411

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